करौली सरकार की जय


# जब आप पहली बार आश्रम आते हैं तो आपको काउंटर नंबर 2 से पूजनीय गुरूजी एवं पूजनीय गुरुमाता जी के लिए अर्जी और बंधन लेना होता है

नोट : 1 बंधन प्रति व्यक्ति

# अर्जी लेने के पश्च्यात दरबार में बैठें व् प्रातः 10 बजे से दरबार में होने वाली वर्कशॉप में अपनी समस्या को समझें व् हिस्सा लें और संकल्प प्रारम्भ होने की प्रतिक्षा करें

# संकल्प होने के बाद काउंटर -1 से हवन किट लेनी होती है जिसकी सहयोग राशि 3551/- रूपए प्रति किट है | यदि आप हवन किट लेने में असमर्थ हैं तो नमन करके भी बाधाओं से मुक्त होकर अपने पूर्वजों को मुक्ति दिला सकते हैं |

नोट : दरबार की ओर से 1 दिन में 1 हवन ही करने की अनुमति है

# 5 हवन कर लेने के बाद आपको दरबार में आकर पुनः संकल्प लेना होता है तथा एक नई ईंट दरबार में जमा करनी होती है जो आप द्वारा 7 हवन करके अमावस्या कर लेने के बाद, आपके पूर्वजों की मुक्ति के पश्चात् आपको यन्त्र के रूप में वापिस मिलती है , जिसे पुनः 1 सिद्ध- हवन करके आपको अपने घर में स्थापित करनी होता है | जिससे आपके घर की शुद्धि होकर , भविष्य में दोबारा से इन आसुरी शक्तियों का आपके घर के वातावरण में प्रवेश नहीं हो पाता है , यदि भविष्य में आप कभी भी अपना घर बदलते हैं तो यही ईंट यन्त्र अपने साथ ले जाकर , नए घर में पुनः एक सिद्ध हवन करके इसे ही पुनः स्थापित कर देने से, घर और जमीन में बसी हुई गन्दी शक्तियों का नाश होकर, आपका घर नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है

नोट 1: उक्त ईंट-यंत्र की स्थापना करके अपने घर के एकांत स्थान में ऊँचे स्थान पर या पूजा घर में ही कहीं अलग रखनी होती है और इसकी पूजा रोज नहीं करनी है , बल्कि इसकी वर्ष में केवल 2 बार अर्थात नवरात्रि की अष्टमी या नवमी को आपके घर पर होने वाले सामान्य हवन-पूजा करके या यदि संभव हो तो दरबार से एक सिद्ध हवन मंगवाकर उससे यन्त्र की पूजन-हवन करके, पुनः वापस स्थापित कर देनी होती है |
इसके पश्चात छठा व सातवां हवन 3 – 3 दिन के अंतराल में करके अमावस्या के पूर्वज-मुक्ति कार्यक्रम में हिस्सा लेकर आप अपने पूर्वजों को मुक्त करा सकते हैं |

नोट 2: ईंट लाने के साथ-साथ पूजनीय गुरूजी व् पूजनीय गुरुमाता जी की अर्जी लगाना एवं दरबार में संकल्प लेना भी अनिवार्य है |